पहली बार कोख में हुई बच्चे की स्पाइनल सर्जरी, 30 डॉक्टरों ने 90 मिनट में ठीक की रीढ़ की हड्डी

Spina bifida

New Delhi: कहते हैं कि धरती पर भगवान का अगर दूसरा रूप है, तो वह है डॉक्टर। सच भी तो है, क्योंकि डॉक्टरों ने जब भी मरीज का इलाज किया है, उस वक्त वह भगवान बनकर मरीज  की जान बचाकर उसे नई जिंदगी दी है। ऐसा ही कुछ पहली बार हुआ लंदन में। लंदन में ऐसा पहली बार हुआ जब मां की कोख में ही बच्चे की स्पाइनल सर्जरी की गई। आमतौर पर यह सर्जरी बच्चे के जन्म के बाद की जाती है। ब्रिटेन में इस तरह की सर्जरी का यह पहला मामला है।

दरअसल, जब बच्चा गर्भ में था तब बच्चे में स्पाइना बाइफिडा नाम की बीमारी का पता चला। ये एक ऐसी स्थिति है जब गर्भावस्था के दौरान बच्चे की रीढ़ की हड्डी ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाती है। इसी स्थिति में रीढ़ की हड्डी में दरार बन जाती है। इस तरह की बीमारी में जन्म के बाद बच्चे को चलने-फिरने में परेशानी होती है। यहां तक की बच्चा ठीक तरीके से खड़ा भी नहीं हो पाता है। इस बीमारी में बच्चा दिमागी रूप से भी कमजोर हो जाता है। आमतौर पर यह सर्जरी बच्चे के जन्म के बाद की जाती है, लेकिन ब्रिटेन में डॉक्टरों ने ये अनोखा काम कर इतिहास रच दिया है। इन्होंने पहली बार बच्चे की स्पाइनल सर्जरी की।

सर्जरी से पहले मां को एनेस्थीसिया दिया गया। बच्चे के स्पाइन वाले हिस्से को खोला गया। डॉक्टरों ने देखा कि निचले हिस्से में रीढ़ की हड्डी मुड़ी हुई थी। इसकी सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद महिला की सामान्य डिलीवरी हुई। डॉक्टर ने बताया कि रीढ़ की हड्डी का विकास एक झिल्लीनुमा संरचना में होता है, जिसमें फ्लूइड भरा होता है। लेकिन स्पाइना बाइफिडा की स्थिति में स्पाइन इससे बाहर निकलने लगती है, इसमें मौजूद फ्लूइड के लीक होने का खतरा बढ़ता रहता है।

लंदन में 200 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों की सर्जरी पहले बेल्जियम और अमेरिका में होती थी। डॉक्टर का कहना है कि अगर प्रेग्नेंसी की शुरूआत से ही महिला फॉलिक एसिड लेती है तो इससे बच्चे में जन्मजात बीमारी का खतरा करीब 50 फीसदी तक कम हो जाता है। भारत में एक हजार बच्चों पर एक स्पाइना बाइफिडा का मामला देखा जाता है।

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