शरद पूर्णिमा पर 30 हजार लोगों को बांटी गई जड़ी-बूटी,2 हजार लीटर ऐसी खीर,दूर होगी दमा की बीमारी

sharad purnima

New Delhi: शरद पूर्णिमा के दिन छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव का नजारा बहुत दिलचस्प था। राजनांदगांव में शरद पूर्णिमा के मौके पर पाताल भैरवी के मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। यहां करीब 10 राज्यों के 30 हजार लोगों को जड़ी-बूटी बांटी गई। यहां रात 8 बजे से दूसरे दिन सुबह 4 बजे तक भक्तों का इंतजार किया गया।

मां पाताल भैरवी की आरती की गई। इस दौरान 2 हजार लीटर खीर भी बांटी गई। कहा जा रहा है कि भक्तों को पूजा के बाद जो खीर बांटी गई है वह सांस और दमा की बीमारी ठीक करने में बेहद कारगर है। प्रसाद ग्रहण करने के लिए छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बंगाल, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, बिहार, यूपी, तेलंगाना और झारखंड के भक्त यहां पाताल भैरवी के दर्शन के लिए पहुंचे थे।

sharad purnima

शरद पूर्णिमा की रात का अगर मनोवैज्ञानिक पक्ष देखा जाए तो यही वह समय होता है जब मौसम में परिवर्तन की शुरूआत होती है और शीत ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा की रात में खीर का सेवन करना इस बात का प्रतीक है कि शीत ऋतु में हमें गर्म पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसी से हमें जीवनदायिनी ऊर्जा प्राप्त होगी। आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। यूं तो हर माह में पूर्णिमा आती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व उन सभी से कहीं अधिक है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है।

शरद पूर्णिमा से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें विशेष अमृतमयी गुणों से युक्त रहती हैं, जो कई बीमारियों का नाश कर देती हैं। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग अपने घरों की छतों पर खीर रखते हैं, जिससे चंद्रमा की किरणें उस खीर के संपर्क में आती है, इसके बाद उसे खाया जाता है। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक रूप से खीर का प्रसाद भी वितरण किया जाता है।

शरद पूर्णिमा से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि इस दिन माता लक्ष्मी रात्रि में यह देखने के लिए घूमती हैं कि कौन जाग रहा है और जो जाग रहा है महालक्ष्मी उसका कल्याण करती हैं तथा जो सो रहा होता है वहां महालक्ष्मी नहीं ठहरतीं। शरद पूर्णिमा को रासलीला की रात भी कहते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था।

About Naina

I believe in the Power of Words.

View all posts by Naina →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *