इस झील में दफन है अरबों रुपए का खजाना, आज तक इसे हाथ तक लगाने की किसी की हिम्मत नहीं हुई

New Delhi: ये झील है HIMACHAL PRADESH में। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में स्थित कमरुनाग झील के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां अरबों रुपए का खजाना दफन है, पर आज तक किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उस खजाने को हाथ भी लगाने की तो आइए जानें क्या राज है ‘कमरुनाग झील’ में दबे खजाने का।

ये झील लोगों के बीच काफी फेमस है। प्रदेश की दुर्गम पहाड़ियों के बीच मौजूद इस झील में अरबों रुपए का खजाना छिपा है। यह झील हिमाचल प्रदेश के मंडी से 60 किलोमीटर की दूरी पर रोहांडा के घने जंगलों में है। इस झील के पास एक प्रख्यात मंदिर है। लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं और मन्नतें मांगते हैं। जब इन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है तो इस झील में वह सोने व चांदी के आभूषण डालकर चले जाते हैं। मंदिर में आकर दर्शन करना फिर, सोने चांदी के आभूषण चढ़ाने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा की वजह से इस झील में सालों में अरबों रुपए का खजाना जमा हो गया है।

लोगों का मानना है, इस झील में मौजूद खजाने की रक्षा खुद देवी-देवता करते हैं। वहीं एक पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इसकी निगरानी एक बड़ा नाग करता है। कहा जाता है कि अगर कोई भक्त सच्चे दिल से आकर इस मंदिर में मनोकामना मांगे तो उसकी सारी मांगे पूरी होती है। कोई भी यहां से खाली हाथ नहीं लौटता है। जब इन लोगों की मनोकामना पूरी होती है तो लोग यहां पर आकर सोने चांदी के आभूषण इस झील मे चढ़ाते है। लोग अपने शरीर का कोई भी गहना यहां चढ़ा देते हैं।

झील पैसों से भरी रहती है, ये सोना-चांदी कभी भी झील से निकाला नहीं जाता क्योंकि ये देवताओं का होता है। ये भी मान्यता है कि ये झील सीधे पाताल तक जाती है। इसमें देवताओं का खजाना छिपा है। देव कमरुनाग को वर्षा का देव माना जाता है। एक मान्यता के अनुसार भगवान कमरुनाग को सोने-चांदी व पैसे चढ़ाने की प्राचीन मान्यता है। यहां जून में लगने वाले मेले के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा झील में सोने-चांदी के गहनों को अर्पित करते हुए देखा जा सकता है।

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